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सहरसा की बेटी ने देश का बढ़ाया मान, पोलैंड में लहराया परचम 

बेटियां सिर्फ घर भर की नहीं बल्कि राज्य और देश की भी नाक होती है

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सहरसा की बेटी ने देश का बढ़ाया मान, पोलैंड में लहराया परचम 

सिटी पोस्ट लाइव स्पेशल : एक बेटी जब बड़ी उपलब्धि हासिल करे,तो उसपर इठलाने का हक उसके जिलावासी, राज्य और देशभर के सभी लोगों मिल जाता है। “कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों “। सच में अगर हौसला और जुनून हो, तो पहाड़ चीरकर भी दूध की दरिया बहाई जा सकती है। सहरसा की इस बेटी आकांक्षा नेहा ने वह करतब कर दिखाया है जिससे देश का सीना चौड़ा हुआ है। आकांक्षा नेहा ने पोलैंड के राष्ट्रपति निवास में रखे रिकॉर्ड बुक में अपना हस्ताक्षर बनाया है। यह पहली भारतीय लड़की है जिसने यह सौभाग्य पाया है। बिजनेस लॉ में उसने 90 फीसदी अंक लाकर देशभर में प्रथम स्थान पाया है। एक से लेकर पांचवें स्थान पाने वाले तक को वहां हस्ताक्षर करने का हक मिलता है। यह बड़ी उपलब्धि हासिल करने पर उसे राष्ट्रपति निवास में जाने का मौका मिला। सहरसा के प्रो.डॉ.अरविंद कुमार सिंह और प्रो. रीना सिंह की पुत्री आकांक्षा नेहा ने यह उपलब्धि पाकर परिवार और शहर ही नहीं, बल्कि बिहार सहित पूरे भारत को गौरव दिलाया है।आकांक्षा नेहा ने सीबीएसइ 10 वीं तक की पढ़ाई सहरसा के संत जेवियर्स स्कूल से की। फिर टेन प्लस टू जमशेदपुर से और मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से कॉरपोरेट इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन की डिग्री ली। उसने मद्रास से ही फिर जीमैट की परीक्षा पास कर लंदन में लंदन बिजनेस स्कूल से एमबीए फिनांस में डिग्री हासिल की। एमबीए पूरा करते ही आकांक्षा नेहा वारसॉ के सिटी बैंक में इन्वेस्टमेंट बैंकर के रूप में पदस्थापित हुई। आकांक्षा ने काम करते हुए निसिनजकर स्कूल ऑफ एजुकेशन और एडमिनिस्ट्रेशन संस्थान से एम.ए. बिजनेस लॉ में 90 फीसदी अंक लाकर सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। इस प्रतिष्ठित कोर्स में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने के ईनाम स्वरूप उसे पोलैंड के राष्ट्रपति निवास में रखे रिकॉर्ड बुक में अपना हस्ताक्षर बनकने का मौका मिला।यह हस्ताक्षर दस्तावेज की तरह दशकों तक संग्रहित रखा जायेगा। रिकॉर्ड बुक को 1918 के नाम से संग्रहित कर के रखा गया है। आकांक्षा नेहा ने उस रिकॉर्ड बुक में अपने नाम के साथ स्पष्ट रूप से सहरसा,बिहार, इंडिया लिखा है। जो निश्चित रूप से बिहार और सहरसा के लिए गौरव की बात है। हमने दूरभाष पर आकांशा नेहा से बात की तो उसने कहा कि वह पेप्सी की मालकिन इंद्रा लुई और आईसीसीआई बैंक की सर्वेसर्वा चंद्रा गोचर को अपना आदर्श मानती है। आगे न्यू बैंकिंग सिस्टम को अपने नेतृव में विकसित करने का उसका संकल्प है। आकांक्षा ने आगे कहा कि नौकरी के साथ-साथ वह अभी MIESZKO SCHOOL OF EDUCATION संस्थान से लॉ और बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में वह एम.ए.भी कर रही है।बताना लाजिमी है कि नेहा के पिता डॉक्टर अरविंद कुमार सिंह सहरसा के S.N.S.R.K.S. कॉलेज में सांख्यकी विभाग में प्राध्यापक और बीसीए के कॉर्डिनेटर हैं। उन्हें सहरसा में कम्प्यूटर का जनक भी कहा जाता है। आकांक्षा की माँ प्रो.रीना सिंह सहरसा के ही प्रेमलता-अमरेंद्र मिश्र कॉलेज में संगीत की प्राध्यापिका हैं। आकांक्षा की कामयाबी से सिटी पोस्ट लाइव परिवार भी खुद को गौरवान्वित समझ रहा है और वह और आगे हिंदुस्तान का सिद्दत से परचम लहराए,इसकी दुआ भी करता है। आखिर में हम यह जरूर कहेंगे की सच्ची लगन और मेहनत कभी जाया नहीं जाती, वह बेहद मीठा और रसीला फल देती है। आकांक्षा पर देश को नाज है और वह देश की ताज है।

सहरसा से संकेत सिंह की स्पेशल रिपोर्ट

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