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कुछ दिनों का मेहमान है मुगलसराय जंक्शन, स्टेशन पर नाम मिटाने का काम शुरू

मुगलसराय का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय होगा

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कुछ दिनों का मेहमान है मुगलसराय जंक्शन, स्टेशन पर नाम मिटाने का काम शुरू

सिटी पोस्ट लाइव : मुगल सल्तनत की एक और निशानी बस अब चन्द ही दिन की मेहमान है। जिसके बाद मुगलसराय जंक्शन का नाम इतिहास बन कर रह जायेगा। मुगलसराय जंक्शन के नाम को बदलने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण पर है। जिसके लिए अब स्टेशन से नाम मिटाने का काम शुरू हो गया है। इसके लिए रेल मंत्रालय से मुगलसराय डिविजनल आफिस में अप्रूवल भेज दिया गया है। नाम बदलने का अप्रूवल आ जाने के बाद यहां पर तैयारियां शुरू हो गई हैं।

इसी कड़ी में मुगलसराय जंक्शन के प्लेटफार्म और शेड पर लिखे पुराने नाम को पेंट कर मिटाया जा रहा है। रेल अधिकारियों का कहना है कि बहुत जल्द ही नया नाम लिख दिया जायेगा। दिल्ली-हावड़ा रेल रूट के सर्वाधिक व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में शुमार है मुगलसराय जंक्शन। इस स्टेशन से रोजाना लाखों की तादाद में यात्री अपना सफ़र करते हैं। रोजाना यहां से लगभग ढाई सौ ट्रेन गुजरती हैं। मुगलसराय जंक्शन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन रखने की प्रक्रिया तकरीबन साल भर पहले उस वक्त शुरू हुई थी जब सूबे में भी भाजपा की सरकार बनी थी। इसके लिए चंदौली के सांसद डॉ महेंद्र नाथ पाण्डेय ने प्रयास किया था।

बता दें कि केंद्र सरकार ने मुगलसराय का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय करने की घोषणा की थी। इसके लिए पिछले कई दिनों से नाम बदलने की कवायद जारी थी। बीते 3 जुलाई को इस आशय का आदेश आने के बाद रेलवे ने प्लैटफॉर्म पर अब मुगलसराय का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय करना शुरू कर दिया है। बताते चलें चार दशक पहले कानपुर से पटना के सफर पर निकले पंडित दीनदयाल उपाध्याय का शव इसी मुगलसराय के रेलवे यार्ड में एक पोल के सहारे पाया गया था। उस समय शव की शिनाख्त नहीं हो पाई पाई थी लेकिन बाद में उनकी शिनाख्त एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय के रूप में हुई थी।

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