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सबसे बड़े अस्पताल का सबसे बड़ा गड़बड़झाला, महिलाओं की जगह पुरुषों की बहाली

महिलाओं के लिये वैकेंसी निकाल अस्पताल प्रबंधन ने पुरुष अभ्यर्थियों को भेजा बुलावा पटना का

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सिटी पोस्ट लाईव : पटना के  आईजीआईएमएस अस्पताल का बहुत बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है.दरसा, अस्पताल प्रबन्धन की तरफ से इस साल मार्च महीने में में कई पदों के लिए विज्ञापन निकाला था जिसमें रेडियोलॉजी टेक्निशियन के तीन पद भी शामिल है. तीनों में से एक-एक पद सामान्य, अति पछिड़ा वर्ग (ईबीसी) और अनुसूचित जाति (एससी) की महिलाओं के लिए आरक्षित बताया गया था.लेकिन पद  महिलाओं के लिए आरक्षित थे, उनके लिए पुरुष उम्मीदवारों को अस्पताल ने बुलावा भेंज दिया. जब ये गड़बड़झाला सामने आया तो  अस्पातल के ही कुछ कर्मचारियों ने दबी जुबान से भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठा दिया. एक कर्मचारी ने सिटी पोस्ट लाईव को फोन कर बताया कि किस तरह से महिलाओं के लिए आरक्षित पदों पर पुरुषों की बहाली करने की कोशिश हो रही है.

सबसे ख़ास बात ये है कि आईजीआईएमएस ने अगले चरण के लिए चयनित उम्मीदवारों की जो सूची जारी की उसमें पांच पुरुष उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं. जब सिटी पोस्ट लाईव ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक मनीष मंडल से ये सवाल पूछा तो वो आपे से बाहर हो गए. बोलने लगे कि आप लोगों को कानून की जानकारी ही नहीं है.  उन्होंने केंद्र सरकार के नियम का हवाला देना शुरू कर दिया और कहा कि नियम के मुताबिक अगर आरक्षित पद के लिए उस श्रेणी से किसी उम्मीदवार ने आवेदन नहीं किया हो तो अन्य उम्मीदवारों पर विचार किया जा सकता है. लेकिन सवाल ये उठता है कि जब आवेदन केवल महिलाओं से माँगा गया था फिर पुरुषों ने कैसे आवेदन कर दिया . सूत्रों के अनुसार अस्पताल प्रबंधन ने महिलाओं के लिए आरक्षित जगहों पर अपने परिचितों को बिठा देने की शाजिश के तहत कुछ लोगों से आवेदन मंगवा लिया गया ताकि महिला अभ्यर्थी नहीं मिलने का बहाना बनाकर अपने लोगों को इस पदों पर बहाल किया जा सके. कायदे से अस्पताल प्रबंधन को फिर से विज्ञापन निकाल कर ये स्पष्ट करना चाहिए था कि पुरुष भी ईन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं.

इसमे शक की कोई गुंजाईश नहीं कि  नियुक्ति प्रक्रिया  संदेह के घेरे में आ गई है.लेकिन फिर भी  पहले चरण में चयनित उम्मीदवारों को अगले चरण की परीक्षा के लिए आठ जुलाई को बुला लिया गया है.जाहिर है यह मामला विवाद में फंसेगा . लेकिन अस्पताल प्रबंधन की दलील पर जरा गौर फरमाइए, उनका कहना है कि उनकी तरफ से  पुरुष अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे ही नहीं गए थे, लेकिन फिर भी आ गए. अब सवाल था कि क्या किया जाए ? तब जाकर नियमावली देखी गई. इसके आधार पर ही सूची प्रकाशित की गई. लेकिन अस्पताल प्रबंधन के पास इस सवाल का जबाब नहीं है कि अगर महिला अभ्यर्थी नहीं मिलती हैं, तो उस स्थिति में पुरुष अभ्यर्थियों का चयन भी हो सकता है, विज्ञापन में ये बात क्यों शामिल नहीं किया गया. असे में बहुत ऐसे योग्य पुरुष अभ्यर्थी आवेदन देने से चूक गए. फिर योग्य अभ्यर्थी कैसे मिलेगें ? सवाल ये भी उठ रहा है कि आखिर किस आरक्षित श्रेणी से किसी महिला उम्मीदवार ने आवेदन नहीं दिया ? जो सूची जारी की गई है उसी में तीनो आरक्षित वर्गों की महिलाएं शामिल है, फिर पुरुष उम्मीदवार कैसे आ गए ? इनमे से किसी सवाल का जबाब अस्पताल प्रबंधन के पास नहीं है .

अब तो इस गड़बड़झाले के सामने आने के बाद इसके पूर्व में हुई भर्ती  प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. अब इस पद के लिए योग्यता रखने वाले पुरुष अभ्यर्थी ये भी सवाल उठायेगें कि महिलाओं के लिए आरक्षित होने के कारण उन्होंने आवेदन नहीं दिया और इस तरह से उनके साथ अन्याय हुआ है ? जब महिलाओं की जगह पुरुष अभ्यर्थियों को ही रखना था तो फिर से विज्ञापन देकर आवेदन मंगवाया जाना चाहिए था .

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