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मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जनजातीय दर्शन एक बहुत बड़ा विषय

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मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जनजातीय दर्शन एक बहुत बड़ा विषय

सिटी पोस्ट लाइव, रांची: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जनजातीय दर्शन एक बहुत बड़ा विषय है। झारखंड आदिवासी बहुल प्रदेश है। देश और हमारे राज्य में बहुत सारे शोध निरंतर होते रहे हैं परंतु मैं समझता हूं कि जहां तक आदिवासी दर्शन की बात है कहीं ना कहीं यह अपने आप में एक बहुत बड़ा समूह है। आदिवासी दर्शन को समझना अथवा शोध करना एक बड़ी चुनौती भी है। मुझे पूरा विश्वास है कि रांची के ऐतिहासिक ऑड्रे हाउस में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय ष्आदि-दर्शनष् सेमिनार का आयोजन राज्य के आदिवासी समुदाय के समग्र विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

आदिवासी समुदायों की 5 हजार संस्कृतियां हैं और 40 हजार भाषाएं
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी दर्शन विषय पर पूरे विश्व में शोध कार्य चल रहे हैं। यह शोध कार्य किस तरीके से चल रहे हैं इसकी भी चर्चा निरंतर होती रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक मुझे जानकारी है कि पूरे विश्व के लगभग 90 देशों में 37 करोड़ आदिवासी रहते हैं। इन समुदायों की 5 हजार संस्कृतियां हैं और 40 हजार भाषाएं समाहित हैं जो सामान्य दिनचर्या में बोली जाती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे विश्व की आबादी का 5ः यानी कि पूरे विश्व में 800 करोड़ की आबादी में लगभग 40 करोड़ आदिवासी समूह के लोग शामिल हैं। मुख्यमंत्री  ने कहा कि आज यह एक बड़ी विडंबना है कि पूरे विश्व की गरीबी में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी आदिवासियों की ही है। आखिर ऐसा क्यों है? यह शोध का ही विषय है।

विकास का आधुनिक मॉडल ने सन्तुलन को बिगाडा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि विकास का आधुनिक मॉडल ने आदिवासी और प्रकृति के रिश्ते के सन्तुलन को बिगाड़ दिया है। संसाधन की ग्लोबल भूख से अधिकतर आदिवासी पहचान को ही आघात पहुंचा है। विश्व में कई देशों ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया आदि ने बड़े पैमाने पर आदिवासियों को अपनी प्रकृति-संस्कृति से अलग किया है और इस समुदाय को पलायन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूरा विश्व जिस आधुनिकीकरण विकास के मॉडल को अपनाया है क्या आदिवासी समूह इस विकास के पैमाने के साथ साथ चल पा रहा है यह एक बहुत ही बड़ा सवाल है?

आदिवासी समूह को जल, जंगल, जमीन से अलग किया गया
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री ने मलेशिया और ब्राजील का उदाहरण देते हुए कहा कि मलेशिया में आदिवासी समुदाय के लोग मछलियां पकड़ कर अपना जीवन यापन करते थे साथ ही संस्कृति के साथ-साथ लंबी यात्रा करते आ रहे थे परंतु उन्हें शोषित और पीड़ित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्राजील के आदिवासी समुदाय जिन्हें गौरानी समूह के रूप में जाना जाता था यह लोग वहां पर गन्ने की खेती करते थे परंतु यह भी शोषित हुए और इन्हें भी पलायन करना पड़ा। मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने कहा कि दुनिया में आत्महत्या करने वालों में सबसे अधिक आदिवासी समूह के ही लोग रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड में खनिज संपदा के उत्खनन के लिए आदिवासी समूह को जल, जंगल, जमीन से अलग किया गया है। आदिवासी समुदाय के जमीनों को छीनने का भी काम किया जा रहा है। झारखंड के आदिवासी समूहों को कॉरपोरेट के नाम पर भी छला गया है। उद्योग के क्षेत्र में जितनी लाभ आदिवासी समाज को मिलनी थी वह लाभ नहीं मिल पाया।

मुख्यमंत्री   हेमंत सोरेन ने कहा कि आदिवासी समुदाय एक ऐसा समूह है जो अपनी परंपरा-संस्कृति को अपने सीने से लगा कर सदैव चलता रहा है। उन्होंने कहा कि हड़प्पा संस्कृति और मोहनजोदड़ो की खुदाई में पाए गए बर्तन में आज भी आदिवासी समुदाय के लोग खाना खाते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों के गिरते जीवन स्तर पर भी हमें चिंतन करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में 1951 ईस्वी तक लगभग 30 से 35ः आदिवासी हुआ करते थे आज आदिवासियों की संख्या मात्र 26ः रह गई है। यह अपने आप में एक बहुत ही गंभीर विषय है कि आखिर आदिवासी समुदाय के लोगों की संख्या कैसे घटी? इस पर शोध और चिंतन नितांत आवश्यक है।

प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में आदिवासी समुदाय की भूमिका अहम
मुख्यमंत्री   हेमंत सोरेन ने कहा कि आज पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के बदलाव के वजह से जो परिस्थिति उत्पन्न हुई है यह काफी चिंतनीय है। प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में आदिवासी समुदाय की भूमिका सबसे अहम रही है और आगे भी रहेगी। ग्लोबल वार्मिंग जैसी चीजों से बचाव आदिवासी समाज से बेहतर और कोई नहीं कर सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश और राज्य में प्राकृतिक सौंदर्य की अपनी पहचान है। इस प्राकृतिक सौंदर्य को विकास की व्यवस्था के नाम पर ईंट, कंक्रीट और पत्थर से नुकसान नहीं पहुंचाना हम सभी का कर्तव्य होना चाहिए। मुख्यमंत्री   हेमंत सोरेन ने कहा कि मैं भी इसी आदिवासी समाज से आता हूं मेरे मन में भी बहुत संवेदनाएं हैं। आदिवासी परंपरा संस्कृति को अच्छा रखने के लिए सरकार भी इस समुदाय के साथ निरंतर कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि डॉ राम दयाल मुण्डा ट्राइबल वेलफेयर रिसर्च इंस्टीट्यूट और अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के सौजन्य से आयोजित इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आदिवासी समुदाय के विकास के लिए बहुत ही हितकर और सकारात्मक होगा। मुख्यमंत्री ने इस आयोजन के लिए आयोजनकर्ताओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

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